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हार्ले डेविडसन ने भारत से कारोबार समेटने का किया फैसला, जानिए क्‍या है वजह

अन्य भारतीय कंपनियों जैसे कि हीरो मोटर्स, बजाज और महिंद्रा के साथ साझेदारी करने की योजना बना रही है हार्ले

इस कोरोना काल में देश की इकॉनमी का बहुत बुरा हाल चल रहा है जिससे कई कंपनियों को घाटा हुआ है | इन कम्पनियों में से एक हार्ले डेविडसन मोटरबाइक ने भी भारत में अपना कारोबार बंद करने का फैसला कर लिया है | कंपनी ने इसकी जानकारी हाल ही में दी है, उनके अनुसार उन्हें भारत में कोई फायदा नहीं हो रहा था | उनका कहना है कि पिछले कई सालों से भारत के कारोबार में उन्हें 22 परसेंट की गिरावट देखने को मिली है |

जैसा कि आप जानते ही हैं कि हार्ले डैविडसन की गाड़ियां बहुत महँगी होती है और शायद इसी वजह से वो भारतीय मार्केट में बने रहने में सफल नहीं हुई | कंपनी ने अपने हरियाणा स्थित मैन्युफैक्चरिंग साइट को बंद करने का फैसला कर लिया है, साथ ही वह अपने गुडगाँव के शोरूम को छोटा करने का मन बना लिया है | आपको बता दें इससे पहले भी कई विदेशी कम्पनियों ने घाटे की वजह से भारत से अपना कारोबार समेट लिया था |

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10 साल से इंडियन मार्केट में सिर्फ 27,000 बाइक्स ही बेच पाए

अमेरिका की दिग्गज कंपनी हार्ले डैविडसन ने 2009 में भारत में अपना कारोबार शुरू किया था और तब से वे इंडियन मार्केट में सिर्फ 27,000 बाइक्स ही बेच पाए | पिछले साल 2019 में उनकी सिर्फ 2,726 बाइक की ही बिक्री हुई थी | हार्ले महंगे सेगमेंट की गाड़ियां बनाता और बेचता है लेकिन इंडियन मार्केट में उससे कम दाम में कई लाजवाब बाइक्स देखने को मिल जाती हैं | इस सेगमेंट में रॉयल एनफील्ड सब से आगे है और वो कई साल से इंडियन मार्केट में बरकरार है क्योंकि उसने इंडियन मार्केट की रणनीति को समझ लिया है |

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बता दें पिछले काफी समय से कई मोटर कंपनियों ने भारत सरकार से अधिक इम्पोर्ट ड्यूटी और टैक्स को लेकर शिकायत भी की है और इस सन्दर्भ में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी से 2017 में बात भी की थी, जिसके सरकार ने हार्ले डेविडसन के ऊपर लगे इम्पोर्ट ड्यूटी को घटा को 100 परसेंट से 50 परसेंट किया था,हालाँकि उससे कोई बात बनी ऐसा नहीं दिख रहा है |

भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी करने की योजना बना रही

आपको बता दें अगर आप हार्ले डेविडसन के बाइक्स के दीवाने रहे हैं तो परेशान और निराश होने की कोई जरुरत नहीं है | हाल ही एक रिपॉर्ट के मुताबिक कंपनी ने कहा है कि वह अपने बिज़नेस मॉडल को चेंज कर रही है और वो कई भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी करने की योजना बना रही है जैसे कि हीरो मोटर्स, बजाज और महिंद्रा, जिससे वो अपने कस्टमर्स कि मांगें पूरी करती रहे और मार्केट में अपनी उपस्थिति बनाये रखे |

इससे पहले भी कई कंपनियों ने इंडियन मार्केट को अलविदा कहा है

इंडियन मार्केट को छोड़कर जाने वाली कंपनियों में हार्ले कोई पहली कंपनी नहीं है, इससे पहले भी कई कंपनियों ने इंडियन मार्केट को अलविदा कहा है | उन कंपनियों में फ़िएट, जनरल मोटर्स, मैन (MAN ) इत्यादि कई कंपनियां शामिल हैं |

कुछ एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यह कंपनियां इंडियन मार्केट और उसकी मांग को समझ नहीं पायी हैं और बड़ी और महँगी गाड़ियां निकालती हैं, लेकिन भारत के अधिकतर लोग कम दाम में मिलने वाली गाड़ियों के दीवाने हैं | ऐसे में ऐसी कंपनियों को मारुती सुजुकी और रॉयल एनफील्ड जैसी कंपनियों से कुछ सीखना चाहिए जो भारत के मार्केट में अपने सेगमेंट के बाकी कंपनियों से सबसे आगे बने हुए हैं |

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