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Covid-19 Pandemic: कोरोना से ठीक होने के बाद भी बीमार क्यों पड़ रहे हैं लोग, कोरोना से ठीक हुए मरीजों पर हुए रिसर्च के बाद सामने आयी कई बातें

कोरोना वायरस का Lungs पर सबसे बुरा प्रभाव पड़ रहा है जिस से सांस लेने में तकलीफ की समस्या से जूझ रहे हैं ठीक हुए मरीज

कोरोना से होने वाली मौतें बहुत ही कम है जो की एक अच्छी बात है, लेकिन covid से रिकवर हो चुके मरीज़ों में कुछ अहम cardiovascular, neurological और psychological असर को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता| वैसे तो इस समय सरकार केवल दो अहम चीज़ों पर अपना ध्यान केंद्रित किये हुए है- मरीज़ों को मरने से बचाना और उनकी सेहत को सही करके जल्द से जल्द उनको वापस हॉस्पिटल से घर पहुँचाना| वैसे तो ये स्ट्रेटेजी काफी हद तक ठीक है लेकिन हाल ही में हुए रिसर्च से पता चल रहा है की कोरोना वायरस शरीर के कई अंगो को अलग-अलग तरीके से नुकसान पहुंचा रहा है और यही कारण है कि कोरोना रिजल्ट नेगेटिव आ जाने के बाद भी मरीज़ को कई तरह की शारीरिक परेशानियों को झेलना पड़ता है|

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इटली में हुए एक ताज़ा शोध के बाद ये बात सामने आयी है की केवल 12 .6 प्रतिशत सही हुए मरीज़ ही खुद को दो महीने के अंडर फिट पा रहे हैं| सबसे ज़्यादा लोगों में थकान की शिकायत पायी गयी है- लगभग कुल मरीज़ों में से आधे को ये दिक्कत आ रही है|

साँसों की दिक्कत ही सबसे ज़्यादा मौतों का कारण बन रही है

SARS-CoV-2 कोरोना वायरस single-stranded RNA viruses के परिवार से है| इस फैमिली के वायरस को शरीर में दूर तक पहुँच बनाने वाले के रूप में जाना जाता है| इन वाइरसों की वजह से सांस की, हार्ट की, लिवर की और दिमाग की स्थिति में परेशानी आती है| मौजूदा pandemic में लोगों की साँसों की दिक्कत को ही देख कर इलाज़ किया जा रहा है और साँसों की दिक्कत ही सबसे ज़्यादा मौतों का कारण बन रही है | वायरल इन्फेक्शन और इन्फेक्शन से लड़ने के लिए शरीर के बर्ताव के साथ-साथ वेंटीलेटर के प्रयोग भी lungs को भी काफी नुकसान पहुंचा रहा है |

Corticosteroids ही एकमात्र ऐसी दवा है जो Lungs को ख़राब होने से बचा रही है लेकिन ज़्यादा दिनों तक इस दवा के प्रयोग के बाद शरीर के अन्य अंगों को नुकसान पहुँच रहा है| लगभग 43 प्रतिशत लोगों को इस दवा के सेवन के दो महीनो बाद तक सांस की तकलीफ की शिकायत है|

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कोरोना वायरस की वजह से demyelinating नामक बीमारी का भी सामना करना पड़ रहा

लोगों में हार्ट inflammation की शिकायत के साथ ही शरीर के अन्य अंगो में blood clotting की भी शिकायत मिली है| कुछ लोगों के नसों और दिमाग में भी blood clotting के असर दिखे हैं| अभी तक तो यही माना जा रहा है की ये blood clotting की प्रॉब्लम इस वायरस द्वारा दिमाग और दिल पर हमले की वजह से हो रहा है लेकिन अब कोरोना वायरस की वजह से demyelinating नामक बीमारी का भी सामना करना पड़ रहा है और यही कारण है की लोगों की सूंघने और स्वाद लेने के ग्रंथियों पर असर पड़ रहा है|

स्लीप मेडिसिन नामक पत्रिका में छपे एक लेख में ये दावा किया गया है कि कोरोना बीमारी से सही होने के बाद 59 प्रतिशत लोगों में से 20 प्रतिशत को insomnia , 15 .8 प्रतिशत लोगों को acute stress , 18.5% लोगों को anxiety , तथा 24 .5 प्रतिशत लोगों को डिप्रेशन की शिकायत आयी है|

शरीर को दोबारा पूरी तरह से स्वस्थ्य होने के लिए समय देना होगा

ये सारी परेशानियां और भी वायरल इन्फेक्शन्स में देखने को मिली हैं लेकिन, कोरोना के मामले में ज़्यादा मेहनत और एक्सरसाइज करना आप के लिए घातक हो सकता है| इसका सबसे सही इलाज़ यह है कि आपको खुद को आराम देना चाहिए तथा शरीर को दोबारा पूरी तरह से स्वस्थ होने के लिए समय देना चाहिए|


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