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Delhi Metro Grey Line: द्वारका-नजफगढ़ के बीच मेट्रो सेवा शुरू, दिल्ली वालों को मिला दिवाली गिफ्ट

इस मेट्रो लाइन का निर्माण दिसंबर 2021 तक पूरा होना था लेकिन कोरोना महामारी के चलते इसमें देरी हो रही है

अक्टूबर 2019 को द्वारका से नजफगढ़ की ओर जाने वाली मेट्रो को खोल दिया गया है | ये ग्रे लाइन की मेट्रो दिल्ली को नजफगढ़ के ग्रामीण इलाके से जोड़ती है| फ़िलहाल इस सेक्शन की लम्बाई 4.2 किलोमीटर है जिसका निर्माण कार्य अभी बाकी है और इसको बताया जा रहा है कि मई 2021 तक पूरा कर दिया जाएगा| हरियाणा और दिल्ली को जोड़ने वाले सेक्शन को अभी पूरा किया जा रहा है| ग्रे लाइन जो कि लगभग 5.4 किलोमीटर लम्बी है वो फेज III प्रोजेक्ट की हिस्सा नहीं थी| यह काफी दिनों के बाद इस प्रोजेक्ट में जोड़ी गयी| DMRC ने द्वारका से नजफगढ़ के सेक्शन के 2.7 किलोमीटर दूरी की पटरी को ऊपर से गुज़ारा है तथा 1.5 किलोमीटर की दूरी अंडरग्राउंड है| ढांसा बस स्टैंड वाला एक्सटेंशन दिसंबर 2020 तक खोल दिए जाने वाला था लेकिन कोरोना महामारी के चलते काम को रोकना पड़ा और अब अनलॉक 4.0 के तहत काम फिर से शुरू किया जा रहा है|

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टनलिंग का काम अच्छे से हो चुका है और नजफगढ़-ढांसा बस स्टैंड वाले सेक्शन के स्टेशन का निर्माण भी प्रगतिशील है- अनुज दयाल

आपको बता दें कि इस साल मई में ही इस प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन की अनुमति मिल गयी थी लेकिन मजदूरों की कमी के कारण काम शुरू नहीं हो पाया| DMRC के पास उस समय लगभग 3500 मजदूर अलग अलग साइटों पर थे जिनको एक जगह ला कर काम नहीं किया जा सका| DMRC के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर(ED) अनुज दयाल का कहना है कि टनलिंग का काम अच्छे से हो चुका है और नजफगढ़-ढांसा बस स्टैंड वाले सेक्शन के स्टेशन का निर्माण भी प्रगतिशील है| उन्होंने आगे बताया कि जो बाकी काम है वो लगभग अगले साल मई तक पूरा हो जाएगा|

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तीन ट्रेन इस स्टेशन की तरफ चलती हैं जिनका ट्रेवल टाइम 6 मिनट 20 सेकंड है

नजफगढ़ ग्रे लाइन के द्वारा दिल्ली से जुड़ा है और और द्वारका से ब्लू लाइन के लिए इंटरचेंज कर सकते हैं | वैसे तो तीन ट्रैन इस स्टेशन की तरफ चलती हैं जिनका ट्रेवल टाइम 6 मिनट 20 सेकंड है| बाकी सब मेट्रो कॉरिडोर की तरह ही ग्रे लाइन में भी स्टैण्डर्ड गौज ट्रैक हैं और इस कॉरिडोर पर काम अक्टूबर 2017 से शुरू हुआ|

टनल की खुदाई के लिए 2 तरीकों का इस्तेमाल किया गया

पहला तरीका यह है कि टनल बोरिंग मशीन से 700 मीटर के सुरंग का निर्माण किया गया तथा कट और कवर तरीके से बाकी 290 मीटर की सुरंग का निर्माण किया गया| इन दो तरीको के इस्तेमाल में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और DMRC के लिए सबसे बड़ी दिक्कत ऊपर चल रही अनगिनत गाड़ियों से आ रही थी| ट्रैफिक ने काम को और भी मुश्किल बना दिया था लेकिन अब नजफगढ़ से ढांसा के बीच का कॉरिडोर पूरा हो चुका है|


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