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पराली जलाना: केजरीवाल ने कहा, दिल्ली के खेतों में 11 अक्टूबर से पराली में Bio -Decomposers का छिड़काव

दिल्ली सरकार के इस फैसले से दिल्ली में हर साल पराली जलाने के कारण होने वाले प्रदूषण से राहत मिलेगी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि 11 अक्टूबर से पराली में बायो डिकम्पोज़र्स की छिड़काव शुरू कर दिया जायेगा | आपको बता दें कि दिल्ली NCR के क्षेत्रों में किसान पराली को जला देते हैं जिसके वजह से भारी मात्रा में CO2 उत्पन्न होता है| Indian Agricultural Research Institute , PUSA के साइंटिस्ट ने सस्ता, आसान और असरदार तरीक़ा खोज निकाला है जिससे पराली को जलाये बिना ही उनसे निजात पाया जा सकता है| CM ने आगे बताया की वैज्ञानिकों ने bio -decomposers कैप्सूल तैयार किया है जिससे पराली को सड़ा कर खाद में बदला जा सकेगा|

कैप्सूल को तरल बना कर पराली में छिड़काव किया जाएगा

इन कैप्सूल्स को तरल रूप में खेतों में छिड़काव किया जाएगा तथा इनके छिड़काव से डंठल सड़ जाएंगे और उनको जलाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी| आपको बता दें कि इस समय दिल्ली कोरोना वायरस के संक्रमणों से वैसे ही जूझ रही है और अगर पराली जला कर वायु प्रदूषण बढ़ाया गया तो लोगों के लिए और भी तकलीफ बढ़ जाएगी| CM ने खरखरी नहर गाँव में स्थित Bio -decomposer सिस्टम का निरक्षण करने के बाद इस बात का दावा किया कि यह छिड़काव न केवल डंठलों को ख़त्म करेगा बल्कि मिटटी को भी और उपजाऊ बनाएगा|

जल्द से जल्द काम शुरू नहीं किया गया तो हवा ख़राब हो जाएगी- CJI SA Bobde

अगर खबरों की माने तो ये भी पता चला है कि दिल्ली NCR के सेक्रेटरीज को भी सुप्रीम कोर्ट के जजों ने बुलाया है तथा इस मामले को गंभीर बताते हुए चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया SA Bobde ने कहा है कि अगर इस पर जल्द से जल्द काम शुरू नहीं किया गया तो हवा ख़राब हो जाएगी| दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के NCR रीजन के सेक्रेटरीज को सुप्रीम कोर्ट ने बुलया है तथा 16 अक्टूबर को बैठक में इनसे पराली जलाने की समस्या से निजात पाने के उपायों के बारे में पूछ-ताछ की जाएगी तथा उसके लिए उपाय भी सुझाया जाएगा|

सुप्रीम कोर्ट 16 अक्टूबर को करेगी सुनवाई

आपको बता दें कि दो एनवायरनमेंट एक्टिविस्ट- एक कक्षा 12 के लड़के और एक लॉ के स्टूडेंट द्वारा पेटिशन डाले जाने के बाद इस पर 16 अक्टूबर की सुनवाई का आदेश दिया है| पेटिशन में यह कहा गया है कि पराली को जलाया ना जाए ताकि दिल्ली और दिल्ली NCR रीजन में रह रहे लोगों को कोई भी वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी का सामना ना करना पड़े| इस पेटिशन के अलावां कोर्ट ने MC Mehta केस की भी सुनवाई की जिसमे उन्होंने उपाय सुझाया था कि Happy seeders नामक मशीन का इस्तेमाल करके पराली से निजात पाया जाया तथा ये काम या तो मुफ्त में किया जाए या फिर सरकार भी इसमें लागत लगाए ताकि किसानो को पराली को हटवाने में नुक्सान का सामना ना करना पड़े|

और भी पेटिशन तथा सुझाव सुप्रीम कोर्ट में डाला गया है और बताया गया है कि लगातार कोशिश के बावजूद सरकार किसानो को पराली जलाने से रोक नहीं पायी है तथा यही हाल रहा तो आने वाले वक्त में कोरोना संक्रमण से हो रही मौतों में भी इज़ाफ़ा होगा और ऐसा सिर्फ इस लिए होगा क्योंकि सरकारें पराली को जलाने से नहीं रोक पायीं|

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