Navratri

Navratri 2020 4th Day पर देश के विभिन्न स्थानों पर माँ कूष्मांडा की पूजा की जाती है

देवी कूष्मांडा की आठ भुजाएं होती हैं इसलिए इनको अष्टभुजी माँ भी कहा जाता है

नवरात्री हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है, यह हमारे देश में अलग-अलग जगहों पर अलग -अलग ढंग से मनाया जाता है Navratri 2020 4th Day | नवरात्री का अर्थ होता है ‘नौ रातें’ इसलिए यह नौ रात और दस दिन तक मनाया जाता है| नवरात्री का त्यौहार पश्चिम बंगाल और गुजरात में बड़ी ही धूम-धाम, श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है| इस सप्ताह के बीच सभी लोग माँ दुर्गा के अर्चना-आराधना में डूबे हुए होते हैं| नवरात्रि के 9 दिनों के दौरान, देवी दुर्गा को विभिन्न अवतारों में पूजा जाता है। प्रत्येक दिन एक विशेष अवतार या रूप को समर्पित होता है और भक्त माँ के हर स्वरुप से प्रार्थना करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं|

Navratri 2020 4th Day माँ कूष्मांडा को समर्पित

नवरात्री के चौथे दिन को दुर्गा के स्वरुप माँ कूष्मांडा के दिन के रूप में मनाया जाता है| कूष्मांडा नाम के अर्थ की बात करें तो कू का अर्थ है ‘थोड़ा’, उषा का अर्थ है ‘गर्म’ या ‘ऊर्जा’, और अंद का अर्थ है ‘ब्रह्मांडीय अंडा’| ऐसा माना जाता है कि देवी कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान के साथ ब्रह्मांड का निर्माण किया था| देवी कूष्मांडा दुर्गा का वह रूप है जिसने अपनी मुस्कान से दुनिया से अंधकार अथवा बुराइयों को समाप्त कर दिया और इसलिए इस रूप में देवी की हर मूर्ति के चेहरे पर एक दयालु मुस्कान देखी जाती है| माँ कूष्मांडा भगवान शिव की पत्नी हैं और भक्त के स्वास्थ्य में सुधार करती हैं| माँ कूष्मांडा की पूजा-अर्चना करने से भक्तों को अपार धन और अपार बल-बुद्धि की प्राप्ति होती है|

Navratri 2020 4th Day-

देवी कूष्मांडा का स्वरुप

देवी कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं| देवी कूष्मांडा का आठवाँ हाथ हमेशा अभयमुद्रा में होता है, जिसमें सभी सिद्धियों और निधियों का आशीर्वाद देने वाली जप माला है| माना जाता है कि दुर्गा के इस रूप में सूर्य के भीतर निवास करने की शक्ति है| इसलिए उनके पास ऊर्जा बनाए रखने और उसको संरक्षित करने की चमक है|

माँ कूष्मांडा की पूजा करने की विधि

माँ कूष्मांडा को हरा रंग अति प्रिय है, इसलिए इस दिन पूजा में बैठने के लिए हरे रंग के आसन का प्रयोग करना बेहतर होता है| देवी कूष्मांडा को लाल फूल पसंद है और यही कारण है कि, भक्त आमतौर पर देवी को लाल गुड़हल प्रदान करते हैं। हालांकि आप एक लाल गुलाब का भी उपयोग कर सकते हैं| सुबह जल्दी स्नान करके पूजा की थाल तैयार करें, जिसमें एक फूल, जल, रोली, मिठाई, एक लाल दुपट्टा और एक सफेद कद्दू शामिल हो| देवी को पूरे मन से फूल, धूप, गंध, भोग चढ़ाये| पूजा के बाद माँ कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगायें| इसके बाद प्रसाद को किसी ब्राह्मण को दान करें और पूजा के बाद अपने से बड़ों को प्रणाम कर प्रसाद वितरित करें और खुद भी प्रसाद ग्रहण करें|

माँ कूष्मांडा के आशीर्वाद के लिए मंत्र

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

माँ कूष्मांडा का आह्वान करने के लिए मंत्र

देवी कूष्मांडा को समर्पित एक स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

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