Navratri

Navratri facts 2020 – नवरात्री के पर्व 17 अक्टूबर से शुरू हो रहा है, माँ भगवती इस बार घोड़े पर सवार होकर आएँगी और हाथी पर उनकी विदाई होगी

सूर्या संक्रांति के दिन से होगी पहले नवरात्रे की शुरुआत

17 अक्टूबर 2020 से शारदीय नवरात्री शुरू हो रही है तथा इसका हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है| इस नवरात्री का लोगों को बेसब्री से इंतज़ार भी रहता है| Navratri facts 2020 नवरात्री का पर्व पूरे 9 दिनों तक मनाया जाता है तथा हर दिन अलग अलग देवियों की पूजा की जाती है| नवरात्री के पर्व को बंगाल में काफी धूम धाम से मनाया जाता है| वैसे तो सम्पूर्ण भारत में इसकी तैयारी ज़ोरों शोरो से होती है| इसमें लोग पहले दिन कलश रखते हैं जो की पुरे नौ दिनों तक पूजा जाता है| इस त्यौहार का महत्व इस लिए भी है क्यूंकि इसके बाद ही दशहरा और दिवाली आती है|

नवे दिन यानी नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है

नवरात्री के हर दिन अलग अलग देवियों की पूजा होती है, ऐसा कहा जाता है कि नवरात्री के पहले तीन दिनों में मां दुर्गा की ऊर्जा और शक्ति की पूजा की जाती है| इसके बाद के तीन दिनों में लक्ष्मी जी और शांति के देवी का पूजन होता है| अगर सातवें दिन यानी सप्तमी की बात करें तो उस दिन ज्ञान और कला की देवी की पूजा की जाती है| आठवें दिन यानी अष्टमी का बड़ा ही महत्व है, इस दिन माता महागौरी की पूजन की जाती है| नवरात्रि नौ दिन की होती है और नवे दिन यानी नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करने का विधान बताया गया है|

Navratri facts 2020 – जानिये किन नौ देवियों की पूजा की जाती है नवरात्रों में:

1. पहले दिन

माता शैलपुत्री का पूजन पहले दिन किया जाएगा, जो कि 17 अक्टूबर को होगा और इसी दिन ही घटस्थापना भी किया जाता है|

2. दूसरे दिन

18 अक्टूबर को नवरात्री का दूसरा दिन है, इस दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी| ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है।

3. तीसरे दिन

19 अक्टूबर को नवरात्री का तीसरा दिन है और इस दिन माँ चंद्रघंटा का पूजा किया जाता है| इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने की होती है। माँ चंद्रघंटा का रूप ही नवरात्री में सबसे ज़्यादा देखने को मिलता है|

4. चौथे दिन

इस दिन माँ कुष्मांडा की पूजा की जाती है| जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब इन्हीं देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी|

5. पांचवे दिन

इस दिन माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है, भगवान स्कंद की माता होने के कारण माँ दुर्गाजी के इस स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है|

6. छठे दिन

इस दिन माता कात्यायनी की पूजा की जाती है| कात्यायनी ही माता पार्वती के लिए दूसरा नाम है, संस्कृत शब्दकोश में उमा, कात्यायनी, गौरी, काली,शाकुम्भरी,हेेमावती व ईश्वरी इन्हीं के अन्य नाम हैं|

7. सातवे दिन

इस दिन माता कालरात्रि की पूजा की जाती है| देवी कालात्रि को व्यापक रूप से माता देवी – काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, मृित्यू, रुद्रानी, चामुंडा, चंडी और दुर्गा के कई विनाशकारी रूपों में से एक माना जाता है। रौद्री और धुमोरना देवी कालात्री के अन्य कम प्रसिद्ध नामों में हैं |

8. आठवे दिन

इस दिन माता महागौरी की पूजा की जाएगी| महागौरी रूप में देवी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल दिखती हैं|

9. नौवे दिन

इस दिन माँ सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है| इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है।

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